24 अक्टूबर 2014

साधना सिद्धि विज्ञान : महालक्ष्मी विशेषांक : जनवरी 2000

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साधना सिद्धि विज्ञान मासिक पत्रिका साधना सिद्धि विज्ञान मासिक पत्रिका का प्रकाशन वर्ष 1999 से भोपाल से हो रहा है. यह पत्रिका साधनाओं के गूढतम रहस्यों को साधकों के लिये स्पष्ट कर उनका मार्गदर्शन करने में अग्रणी है.

साधना सिद्धि विज्ञान मासिक पत्रिका
साधना सिद्धि विज्ञान  मासिक पत्रिका का प्रकाशन वर्ष 1999 से भोपाल से हो रहा है.
यह पत्रिका साधनाओं के गूढतम रहस्यों को साधकों के लिये  स्पष्ट कर उनका मार्गदर्शन करने में अग्रणी है.

गुरुदेव स्वामी सुदर्शन नाथ जी तथा गुरुमाता साधनाजी के साधनात्मक अनुभव के प्रकाश मे प्रकाशित साधनात्मक ज्ञान आप को स्वयम अभिभूत कर देगा 


[ Sadhana Siddhi Vigayan monthly magazine,a knowledge bank of Tantra, Mantra, Yantra Sadhana]

समस्त प्रकार की साधनात्मक जानकारियों से भरपूर शुद्द पूजन तथा प्रयोगों की जानकारी के लिये
साधना सिद्धि विज्ञान पढें:-

वार्षिक सदस्यता शुल्क = 250 रुपये मनीआर्डर द्वारा निम्नलिखित पते पर भेजें
अगले माह से आपकी सदस्यता प्रारंभ कर दी जायेगी

पत्रिका कार्यालय का पता:-
साधना सिद्धि विज्ञान
शोप न. 5 प्लाट न. 210
एम.पी.नगर
भोपाल [म.प्र.]462011
0755- 4269368
0755- 4283681
0755- 4221116

23 अक्टूबर 2014

साधना सिद्धि विज्ञान : चंडी विशेषांक : दिसंबर 1999

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साधना सिद्धि विज्ञान मासिक पत्रिका
साधना सिद्धि विज्ञान  मासिक पत्रिका का प्रकाशन वर्ष 1999 से भोपाल से हो रहा है.
यह पत्रिका साधनाओं के गूढतम रहस्यों को साधकों के लिये  स्पष्ट कर उनका मार्गदर्शन करने में अग्रणी है.

गुरुदेव स्वामी सुदर्शन नाथ जी तथा गुरुमाता साधनाजी के साधनात्मक अनुभव के प्रकाश मे प्रकाशित साधनात्मक ज्ञान आप को स्वयम अभिभूत कर देगा 


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दीपावली : सम्पूर्ण महालक्ष्मी पूजनम










॥ ॐ परम तत्वाय नारायणाय गुरुभ्यो नमः ॥









21 अक्टूबर 2014

अघोर : १०८ लक्ष्मी ताबीज



गुरुदेव परमहंस स्वामी निखिलेश्वरानंद जी द्वारा प्रदत्त 108 महालक्ष्मी यंत्र
आवश्यक सामग्री.
  1. भोजपत्र 
  2. अष्टगंध
  3. कुमकुम.
  4. चांदी की लेखनी , चांदी के छोटे से तार से भी लिख सकते हैं.
  5. उचित आकार का एक ताबीज जिसमे यह यंत्र रख कर आप पहन सकें.
  6. दीपावली की रात या किसी भी अमावस्या की रात को कर सकते हैं.

विधि विधान :-
 
  • धुप अगर बत्ती जला दें.
  • संभव हो तो घी का दीपक जलाएं.
  • रात्रि 11 बजे के बाद , स्नान कर के बिना किसी वस्त्र का स्पर्श किये पूजा स्थल पर बिना किसी आसन के जमीन पर बैठें.
  • मेरे परम श्रद्धेय सदगुरुदेव डॉ.नारायण दत्त श्रीमाली जी को प्रणाम करें.

  • 1 माला गुरु मंत्र का जाप करें " ॐ परम तत्वाय नारायणाय गुरुभ्यो नमः ". उनसे पूजन को सफल बनाने और आर्थिक अनुकूलता प्रदान करने की प्रार्थना करें.
  • इस यन्त्र का निर्माण अष्टगंध से भोजपत्र पर करें.
  • इस प्रकार 108 बार श्रीं [लक्ष्मी बीज मंत्र] लिखें.
  • हर मन्त्र लेखन के साथ मन्त्र का जाप भी मन में करतेरहें.
  • यंत्र लिख लेने के बाद 108 माला " ॐ श्रीं ॐ " मंत्र का जाप यंत्र के सामने करें.
  • एक माला पूर्ण हो जाने पर एक श्रीं के ऊपर कुमकुम की एक बिंदी लगा दें.
  • इस प्रकार १०८ माला जाप जाप पूरा होते तक हर "श्रीं"  पर बिंदी लग जाएगी. 
  • पुनः 1 माला गुरु मंत्र का जाप करें " ॐ परम तत्वाय नारायणाय गुरुभ्यो नमः ".
  • जाप पूरा हो जाने के बाद इस यंत्र को ताबीज में डाल कर गले में धारण कर लें.
  • कोशिश यह करें की इसे न उतारें.
  • उतारते ही इसका प्रभाव ख़तम हो जायेगा. ऐसी स्थिति में इसे जल में विसर्जित कर देना चाहिए . अपने पास नहीं रखना चाहिए. अगली अमावस्या को आप इसे पुनः कर सकते हैं.
आर्थिक अनुकूलता प्रदान करता है.धनागमन का रास्ता खुलता है.महालक्ष्मी की कृपा प्रदायक है.

17 अक्टूबर 2014

तारा साधना : 23 अक्टूबर : सूर्यग्रहण


  • सूर्य ग्रहण तारा साधना का सबसे उपयुक्त समय है ।
  • तारा काली कुल की महविद्या है । 
  • तारा महाविद्या की साधना जीवन का सौभाग्य है । 
  • यह महाविद्या साधक की उंगली पकडकर उसके लक्ष्य तक पहुन्चा देती है।
  • गुरु कृपा से यह साधना मिलती है तथा जीवन को निखार देती है ।
  • साधना से पहले गुरु से तारा दीक्षा लेना लाभदायक होता है । 
  • तारा दीक्षा से सम्बंधित जानकारी के लिए  संपर्क कर सकते हैं:-
  • साधना सिद्धि विज्ञान 
    जास्मीन - 429
    न्यू मिनाल रेजीडेंसी 
    जे. के. रोड , भोपाल  [म.प्र.]

    दूरभाष : (0755) --- 4269368,4283681,4221116

    जानकारीजिज्ञासासूचना हेतु कार्यालय में सम्पर्क का समय :
    १० बजे से  बजे तक (रविवार अवकाश)
     

  •  








तारा मंत्रम

 ॥ ऐं ऊं ह्रीं स्त्रीं हुं फ़ट ॥






  1. मंत्र का जाप रात्रि काल में ९ से ३ बजे के बीच करना चाहिये.
  2. यह रात्रिकालीन साधना है. 
  3. सूर्यग्रहण से प्रारंभ करें और अगली अमावस्या तक करें.
  4. गुलाबी वस्त्र/आसन/कमरा रहेगा.
  5. उत्तर या पूर्व की ओर देखते हुए जाप करें.
  6. यथासंभव एकांत वास करें.
  7. सवा लाख जाप का पुरश्चरण है. 
  8. ब्रह्मचर्य/सात्विक आचार व्यव्हार रखें.
  9. किसी स्त्री का अपमान ना करें.
  10. क्रोध और बकवास ना करें.
  11. साधना को गोपनीय रखें.


प्रतिदिन तारा त्रैलोक्य विजय कवच का एक पाठ अवश्य करें. यह आपको निम्नलिखित ग्रंथों से प्राप्त हो जायेगा.

तारा स्तव मंजरी
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